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गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है? श्री गणेश जी की कहानी हिंदी में

गणेश चतुर्थी की कहानी: दोस्तों हम सभी कितने खुशनसीब हैं की हम भारत जैसे देश में पैदा हुए हैं। जहाँ हर त्यौहार खासा हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है. यहाँ हर धरम के लोग रहते है और इसी वजह से सभी साथ मिलकर हर त्यौहार मानते हैं। और आज का हमारा यह लेख समर्पित है देवताओं में प्रथम पूज्य श्री गणेश जी को। बिलकुल क्यूंकि इस साल 10 सितम्बर 2021 को गणेश चतुर्थी है। तो चलिए जानते हैं गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

हालाँकि आमतौर पर सभी जानते हैं गणेश जी की कहानी लेकिन वही कई लोग अब भी इस बारे में नहीं जानते है। तो मई आपको बता दूँ की गणेश जी माता पार्वती और भगवान शंकर के छोटे पुत्र है। और इन्हे अपने माता पिता की अनन्य भक्ति के कारन देवताओं में प्रथम पूज्य होने का सम्मान प्राप्त है। ऐसे तो यह त्यौहार पुरे भारत में हर्ष के साथ मनाया जाता है लेकिन विशेष तौर पर महाराष्ट्र में सभी लोगों को इस त्यौहार का पूरे साल इंतज़ार रहता है।

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भगवन श्री गणेश स्वयं सौभाग्य सूचक है। यानि की बहुत ही सौभाग्यशाली है और साथ ज्ञान और समृद्धि के प्रतीक हैं। और गणेश चतुर्थी का मतलब है इसी दी भगवन गणेश का जन्म हुआ था। हमारे भारत में कोई नहीं अच्छा और नया काम शुरू करने के पहले गणेश जी की पूजा अवस्य की जाती है।

भगवन गणेश का विवाह देवी रिद्धि और सिद्धि से हुआ है इसलिए यह रिद्धि- सिध्दि के डाटा भी है। जहाँ भगवान गणेश होते है वहां सफलता और प्रसिद्धि भी आ जाते हैं। यह विनायक और विघ्नहर्ता आदि नमो से भी जाने जाते हैं। इसलिए आज मैंने सोचा की क्यों न आप लोगों की गणेश चतुर्थी क्या है इसे क्यों मनाया जाता है के बारे में पूरी जानकारी आप लोगों के साथ स्झ की जाये। तो फिर चलिए बिना देरी किये शुरू करते हैं।

गणेश चतुर्थी क्या है?

दोस्तों चूँकि गणेश जी का एक नाम विनायक भी है इसलिए गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहते हैं। और यह खासकर हिन्दुओं का त्यौहार है। इस त्यौहार के दौरान लोग पूरी तरह से गणपति बाप्पा की पूजा आराधना में सराबोर हो जाते हैं। गणेश चतुर्थी की पूजा की शुरुआत भजन, प्रार्थना और प्रसिद्ध हिंदू ग्रंथ जैसे गणेश उपनिषद से होती है। और पूजा अर्चना के बाद गणेश जी को कई सारी मिठाइयों और विशेषकर मोदक का भोग लगाया जाता है। और फिर लोगो में प्रसाद बांटा जाता है।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

दोस्तों यह माहौल काफी सुन्दर होता है। इस त्यौहार का बहुत ही भव्य आयोजन किया जाता है। कई कई लोग गणेश जी की बड़ी बड़ी प्रतिमाएं स्थापित करते हैं। और इन दिनों में जगह जगह भंडारे का भी आयोजन होता है। बाप्पा के सामने बैठ कर लोग भजन करते है। गणेश चतुर्थी के दौरान सुबह शाम भगवान् की आरती की जाती है और लडुओं और मोदक का भोग लगाया जाता है। महाराष्ट्र में यह तयोहार इतनी खूबसूरती से मनाया जाता है की लोग इसे देखने दूर दूर से आते हैं।

 DayDateStates
शुक्रवार(Friday)
10 September, 2021Maharashtra, Goa, Tamil Nadu, Karnataka, and Andhra Pradesh

गणेश चतुर्थी कब है 2021 में?

गणेश चतुर्थी 2021 में शुक्रवार, 10 सितम्बर, 2021 (10/09/2021) को मनाई जाएगी।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाते हैं?

दोस्तों हिन्दू सभ्यता के अनुसार हमारे कई सारे देवी देवता है और उनमे से ही एक हैं श्री गणेश। श्री गणेश जी की कहानिया और उनके विषय में जानना सभी को बहुत पसंद आता है। यहाँ ऐसी मान्यता है की जब गणेश चतुर्थी पर गणेश जी आते है तो बहुत सारी सुख और समृद्धि लाते हैं। और हमारी सारी परेशानियों और मुश्किलों को दूर कर देते हैं। श्री गणेश को प्रसन्न करने के लिए सभी उनके जन्मदिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते है।

लोग इस दिन अच्छे वास्ता पेहेन कर भगवन के लिए कई तरह के पकवान बनाते हैं और पूरे श्रद्धा भाव प्रभु की मूर्ति की स्थापना करते हैं। हिंदू धर्म में गणेश जी की पूजा करने का बहुत ही अधिक महत्व है कहा जाता है कि जो लोग पूरी आस्था और विश्वास के साथ विघ्नहर्ता की पूजा करते हैं, उन्हें खुशी, ज्ञान, धन और लंबी आयु प्राप्त होगी। और उनकी सभी मनोकामनाएँ भी पूरी होती है।

गणेश चतुर्थी की शुभ मुहूर्त कब है?

दोस्तों हमारे शास्त्रों में यही बताया गया है की घर पर भगवान् की मूर्ति हमेशा शुभ मुहूर्त में ही लानी चाहिए। यदि आप भी अपने घर में गणेश जी की मूर्ति लाना चाहते हैं तो नीचे दिए मुहूर्त में ही लायें।

लाभ समय : दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से 3 बजकर 52 मिनट तक
सुभ समय : सुबह 7 बजकर 58 से 9 बजकर 30 तक

वहीँ शाम की मुहूर्त है : – 06:54 PM to 08:20 PM

गणेश जी की मूर्ति स्थापना आप 10 September 2021 को इस समय कर सकते हैं : –

अमृत समय : 03:53 PM to 05:17 PM
सुभ समय : 09:32 AM to 11:06 AM

गणेश पूजा को हमेशा ज्यादा अच्छा समझा जाता है अगर आप उसे दोहपर के समय में करें : –

11:25 AM से लेकर 01:54 PM के बीच में.

गणेश जी की पूजा करने के लिए इस मुहूर्त को सबसे शुभ माना गया है।

गणेश चतुर्थी के मुख्य मंत्र क्या हैं?

गणेश चतुर्थी में भगवान श्री गणेश किये जाने वाले मन्त्रों में से जो सबसे मुख्य मंत्र है,

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी समप्रभ .

निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा..

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गणेश चतुर्थी : भारत को छोड़कर इसे और कहाँ मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी का त्यौहार न सिर्फ भारत में बल्कि भारत को छोड़कर Thailand, Cambodia, Indonesia, Afghanistan, Nepal और China में भी मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी का महत्व

दोस्तों हमारे हिन्दू धर्म में हर देवी देवता से जुडी कई कहानिया है और ऐसे में भगवन गणेश के जन्म और उनके बालपन की भी अनेक कहानिया है। चाइये आज इसके बारे में भी जानते हैं-

एक बार की बात है माता पारवती को स्नान करने जाना था और कोई भी सेवक वहां मौजूद नहीं था जो बहार खड़ा रह कर पहरेदारी कर सके। माता उस वक़्त अपने शरीर पर लगा उबटन छुड़ा रही थीं। तो उन्होंने उसी उबटन को छुड़ाकर उसे एकत्र किया और एक बालक का आकार दे दिया। और फिर उस पुतले में उन्होंने प्राण फूंक दिए । यानि की पुतले को जीता जगता बालक बना दिया। और माता ने उस बालक से कहा की में स्नान करने जा रही हूँ और बिना मेरी आज्ञा के किसी को अंदर मत आने देना। अब माता अंदर स्नान करने चली गयी और वह बालक वही द्वार पर खड़ा होकर पहरा देने लगा।

वह बालक एकदम सजग होकर पहरेदारी कर रहा था की तभी वहां भगवन शंकर आ जाते है। और वह माता पारवती से मिलने के लिए अंदर जाने लगते हैं की तभी बाहर पहरेदारी करता हुआ बालक उन्हें रोक देता है। भगवान शंकर उस बालक को द्वार से हटने के लिए कहते हैं। परन्तु, वह बालक माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए, शंकर जी को अंदर प्रवेश करने से मना करता है। जिस कारण भगवान शंकर क्रोधित हो जाते हैं। और, क्रोध में उन्होंने अपना त्रिशूल निकाल कर बालक की गर्दन को धड़ से अलग कर दिया।

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बालक चिल्लाता है और तेज़ आवाज़ सुनकर माता घबरा कर भर आ जाती है। और, जब माता ने देखा की वह बालक उनकी आज्ञा का पालन करते हुए भयंकर दंड का भागी बन चूका है तो माता बहुत दुख और क्रोध से भर जाती है। और, किसी भी कीमत पर बालक को पुनः जीवित करने को कहती है। परन्तु यह कार्य बहुत ही आसान नहीं था। सर को जोड़ने के लिए किसी ऐसे बच्चे का सर चाहिए था जिसकी माँ उसकी तरफ पीठ कर के सो रही हो।

भगवन ने अपने सभी सेवको को आदेश किया की ऐसा कोई सर ढूंढ के लाया जाये। सेवक सभी जगह खप्जतें हैं परन्तु कही पर भी ऐसा कोई बच्चा नहीं मिलता है। तब एक सेवक ने देखा की एक हथिनी अपने बच्चे की और पीठ कर के सो रही है। इसलिए वो उसी हथिनी के बच्चे का सर काटकर ले आते हैं। ऐसे में भगवन शंकर उसी हठी के सर को बालक धढ़ से जोड़ देते है।

माता पार्वती बहुत प्रसन्न हो जाती है और उस बालक को अपना पुत्र मान लेती है। शंकर जी भी उसे पुत्र रूप में स्वीकार कर के उस बालक को सभी गणों का स्वामी बना देते हैं। और, इसीलिए उनका नाम गणपति पड़ जाता है। हाथी का सर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहा जाता है।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

दोस्तों अब जानते है व्रत कथा के बारे में। एक बार की बात है एक गांव में एक अंधी बूढी औरत रहती थी। उनके एक बेटा और बहु थे। वह बूढी स्त्री गणेश जी की भक्त थी और एक बार उसकी भक्ति से खुश होकर गणेश जी प्रकट हो गए और बोले -हे मां! आप जो चाहे सो मांग लो।’ मैं आपकी सभी मनोकामना पूरी करूंगा।बुढ़िया बोलती है मुझे तो मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू?गणेश जी बोलते है कि अपने बेटे-बहू से पूछकर मांग लो कुछ।

बूढी औरत ऐसा ही करती है और अपने बेटे से पूछने चली जाती है। और, बेटे को सारी बात बताकर पूछती है की बेटे मैं क्या मांगू? पुत्र कहता है कि मां तू धन मांग ले। उसके बाद बहू से पूछती तो बहू नाती मांगने के लिए कहती है। फिर उस बूढी औरत ने सोचा कि ये सब तो अपने-अपने मतलब की चीज़े मांगने के लिए कह रहे हैं। लेकिन, वो अपनी पड़ोसिनों से पूछने चली जाती है, तो पड़ोसन कहती है, अरे, तू तो थोड़े दिन और जीएगी, क्यों तू धन मांगे और क्यों नाती मांगे। तू तो अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी जिंदगी आराम से कट जाए।

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बहुत सोच विचार करने के बाद वह गणेश जी से बोली – की हे प्रभु यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता, दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।’ यह सुनकर गणेश जी बोले- बुढ़िया मां! आपने तो सब कुछ मांग लिया। फिर भी जो आपने मांगा है वचन के अनुसार सब मिलेगा। और यह कहकर गणेशजी अंतर्ध्यान हो जाते है। बुढ़िया मां ने जो- जो मांगा, उनको मिल गया।हे गणेशजी महाराज!! जैसे आपने उस बुढ़िया मां को सबकुछ दिया, वैसे ही सबको देना।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि

गणेश चतुर्थी पर सुबह सुबह नाहा धोकर साफ़ वस्त्र पहन ले। वस्त्र यदि लाल रंग के होंगे तो बहुत ही शुभ होगा। क्यूंकि ऐसा मन जाता है की लाल वस्त्र गणेश जी को अधिक प्रिय हैं। ध्यान रखें की पूजा के दौरान गणेश जी का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखें। सबसे पहले प्रभु का अभिषेक किया जाता है पंचामृत से। जैसा की नाम से ही पता लगता है की पंचामृत का अर्थ है पांच तरह की मेवा से जैसे – दूध से, फिर दही से, घी से, शहद से और अंत में गंगा जल से। इसके बाद गणेश जी पर रोली, सिंदूर और मौली चढ़ाई जाती है।

उनकी पत्नियों रिद्धि-सिद्धि के रूप में दो सुपारी और पान चढ़ाए जाते हैं। फिर फल, पीला कनेर का फूल, दूब (दुर्बा) चढाया जाता है। सभी लोग गणेश जी की आरती गाते है। इसके बाद उनकी सबसे प्रिय मिठाई मोदक का भोग लगाया जाता है।

गणेश चतुर्थी के कितने मुख्य अनुष्ठान होते हैं और क्या हैं, साथ में इन्हें कैसे किया जाता है?

मुख्य रूप से गणेश चतुर्थी के चार अनुष्ठान होते हैं।
प्राणप्रतिष्ठा – इस प्रक्रिया में भगवान को मूर्ति में स्थापित किया जाता है।
षडोपचार – इस प्रक्रिया में 16 forms (सोलह रूप) में गणेश जी को श्रधांजलि अर्पित की जाती है।
उत्तरपूजा – यह एक ऐसी पूजा है जिसके करने के उपरांत मूर्ति को को कहीं भी ले जाया जा सकता है एक बार भगवान को स्थापित कर दिया जाये उसमें तब।
गणपति विसर्जन – इस प्रक्रिया में मूर्ति को नदी या किसी पानी वाले स्थान में विसर्जित किया जाता है।

गणेश चतुर्थी कब मनायी जाती है?

गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, जो की आमतौर पर अगस्त और सितंबर के बीच आती है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति लाते हैं और 10 दिनों तक पूजा करते हैं और 11 वें दिन बड़ी धूम धाम से गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।

जब तक गणेश जी का मूर्ति का स्थापन रहता है तब तक रोज़ उन्हे स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, और रोज विधिवत धार्मिक मन्त्रों का उच्चारण करके उनकी पूजा अर्चना की जाती है। सभी लोग, भगवान से अपनें जीवन में सुख समृद्धि और धन- बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।

मेरी बात

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