Hello!! मेरे प्यारे पाठक बंधुओं उम्मीद करती हूँ की इस खूबसूरत और रौशनी से भरे त्योहारों की आगाज ही आपके लिए बहुत सुंदर होगी। दोस्तों अक्टूबर महीना शुरू होते ही हमारे देश में त्योहारों की धूम हो जाती है एक बाद एक त्यौहार आते हैं। दुर्गा पूजा का यह पावन पर्व चल रहा है और इसके अंतिम दिन दशेहरा होगा। भला इंडिया में कौन ऐसा होगा जो की दशहरा के बारे में न जानता हो। लेकिन क्या आप जानते हैं की Dussehra Kyu Manaya Jata Hai?
दोस्तों दशहरा जिसे हम विजयादशमी के नाम से भी जानते हैं। दोस्तों यह हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। लेकिन भारत में रहने वाला हर धर्म का व्यक्ति इसे खूब उत्साह से मनाता है। पहले नौ दिन देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन रावण दहन होता है। यह एक शुभ अवसर है और यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तो चलिए जानते है दशहरा क्यों मनाया जाता है।
दशहरा 2021: तिथि और समय
Table of Contents
- विजय मुहूर्त – 14:01 से 14:47
- अपर्णा पूजा का समय – 13:15 से 15:33
- दशमी तिथि शुरू – 18:52 अक्टूबर 14
- दशमी तिथि समाप्त – 18:02 अक्टूबर 15
- श्रवण नक्षत्र प्रारंभ – 14 अक्टूबर को 09:36
- श्रवण नक्षत्र समाप्त – 09:16 अक्टूबर 15
दशहरा क्या है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, दशहरा त्योहार अश्विन के महीने में मनाया जाता है और यह दसवें दिन पड़ता है। यह त्यौहार नौ दिवसीय नवरात्रि के समापन के बाद मनाया जाता है। दरअसल दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है। दरअसल इसके पीछे की कहानी भले ही युगो पुरानी हो लेकिन इसके पीछे का सन्देश और उद्देश्य आज भी सार्थक है।
आज भी कहीं न कहीं हम सभी के अंदर बुराई का रावण छुपा हुआ है और यह हर साल मनाया जाने वाला दशहरा एक नए मौके की तरह है ताकि हम अपने अंदर छुपी बुराइयों का दहन उस रावण के साथ ही कर दें। दशहरा मानाने की हमारे देश में अलग अलग मान्यताएं और कहानियां हैं। जैसे सामान्यतः तो सभी लोग इसे रामायण की मानयता के आधार पर मनाते हैं वहीँ कुछ जगह पर किसानो की फसलें लाने का समय होता है तो वहीँ सैनिकों के लिए शास्त्र पूजा का दिन होता है।
हिन्दू धर्म की मान्यताओं और प्रसिद्ध ग्रंथ, रामायण के अनुसार भगवान राम ने अहंकारी राक्षस, रावण को मारने के लिए देवी दुर्गा माता का आशीर्वाद पाने के लिए एक चंडी-पूजा (पवित्र प्रार्थना) की थी। और कहा जाता है की माता दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर का वध किया था।
Name | दशहरा, Dussehra, Vijayadashmi |
अन्य नाम | विजयादशमी, बिजोया, आयुध पूजा |
आरम्भ | रामायण काल से |
तिथि | अश्विन दशमी |
Objective | Religious Faith, Entertainment festive |
Followers | Hindu, Indians |
दशहरा का इतिहास
दोस्तों दशहरा का इतिहास काफी पुराना है। जैसा की हमने बताया की इसके पीछे कई मान्यताएं जुडी हैं। इस दिन माता दुर्गा ने एक महा शक्तिशाली और आततायी राक्षस महिसासुर का 9 दिन और 10 रातो के युद्ध के बाद संहार किया था। दक्षिण भारत में, दशहरा का उत्सव मुख्य रूप से मैसूर, कर्नाटक में उस दिन के रूप में मनाया जाता है जब देवी दुर्गा के एक अन्य अवतार चामुंडेश्वरी ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। पूरा शहर रंगीन रोशनी से जगमगाता है और खूबसूरती से सजाया जाता है। वास्तव में देवी चामुंडेश्वरी के जुलूस ले जाने वाले हाथियों के परेड भी पूरे शहर में किए गए थे।
Dussehra Kyu Manaya Jata Hai?
भारत के उत्तर भाग में दशहरे का विशेष महत्व है। दरसल बात त्रेता युग की है। अयोध्या नाम की नगरी में महाप्रतापी राजा दशरथ के 4 चार पुत्र थे राम भारत लक्ष्मण और शत्रुघ्न। चरों भाइयों में बहुत ही स्नेह था। चारो साथ खेले और बड़े हुए यहाँ तक की चारों का विवाह भी एक साथ जी करवाया गया। विवाह के बाद महाराज दशरथ ने अपने पुत्र राम को राजा बनान चाहा।
लेकिन यह बात छोटी रानी कैकयी को बिलकुल भी ठीक नहीं लगी और उन्होंने राजा से 2 वरदान मांग लिए पहले वरदान में अपने पुत्र भारत के लिए राजगद्दी और दूसरे वरदान में राम को 14 सालो का वनवास। महाराज अपने वचन से बंधे थे इसलिए कुछ कह न सके और प्रभु राम के साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्षम भी वन चले गए।
वन में एक दिन कुटिया के ऊपर आकाश मार्ग से एक राक्षसनी सूर्पनखा जा रही थी वह उसने भगवन राम को देखा और उनपर मोहित होकर उनसे विवाह के लिए कहने लगी लेकिन राम जी एक पत्नी व्रत ले चुके थे इसलिए उन्होंने उससे विवाह करने से मना कर दिया जिससे वह राक्षसनी क्रोधित होकर सीता माता को मरने के लिए दौड़ी और तभी लक्षमण ने उसके नाक और काम काट दिए वह रोटी रोटी अपने भाइयों के पास गयी।
Dussehra Kyu Manaya Jata Hai?
और रावण को बताय की राम की पत्नी सीता बहुत ही सुंदर है रावण फ़ौरन माता सीता को अपहरण कर ले लंका ले आया। पत्नी को न पाकर श्री राम उनकी खोज में निकल पड़े और रस्ते में उनकी मित्रता वानर राज सुग्रीव से हुई उन्होंने सुग्रीव के भाई बलि को मरकर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया और सुग्रीव ने माता सीता को खोजने रामजी की मदद की।
तब पता चला की माता को समुद्र के पार लंका में है और हनुमान जी ने समद्र को पार कर लंका पहुंच गए और माता सीता को संदेसा और रावण को चेतावनी दी की प्रभु राम जल्दी उन्हें लंका से ले जायेगे। फिर क्या था हनुमान जी ने वापस आ कर साड़ी कथा रामजी को बताई और सबने अब जल्दी से समुद्र को पर करने के लिए सेतु का निर्माण किया।
बहुत भयंकर युधा हुआ और इस युद्ध में रावण के भाई भतीजे और बेटे सभी मारे गए। अब बारी थी रावण की वह सबसे आखिरी में युद्ध करने आया। रावण बहुत ही शक्तिशाली और बुद्धिमान था। वे भगवन शंकर का अनन्य भक्त था परन्तु बहुत ही अहंकारी था जो की उसकी मृत्यु का कारन बना। भगवन राम की विजय हुई और इसी दिन जब रावण मारा गया तभी विजयादशमी मनाई जाती है।
दशहरे का क्या महत्व है?
दोस्तों दशहरे का बहुत ही ज्यादा महत्व है क्यूंकि यह हमे बताता है की बुरे काम का नतीजा हमेशा बुरा ही होता है। और अहंकारी व्यक्ति कितना ही बुद्धिमान क्यों न हो उसका पतन होता ही है। इसलिए सभी को अपने अंदर ही हर बुराई को दूर करना का प्रयास करना चाहिए।
और साथ ही चूँकि इस त्यौहार का सम्बन्ध माता दुर्गा से है इसलिए यह सिखाता है की संसार की रचना आदिशक्ति जगदम्बा से हुई है। जिसे कोई देवता न हरा सके उस महिषासुर का वध माता दुर्गा ने किया। इसलिए कभी भी स्त्रियों को कमजोर न समझें। उनका सम्मान करें।
मेरी बात
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